Monday, 26 September 2011

jivan

संयत  कर  अपने मन को ,
अपनी भावनाएं अपने जीवन को 
सपनो की दुनिया से  बहार निकल 
जीवन को सजाना ,
संवारना नये सिरे से 
फिर से बार -बार 
एक नही अनेको बार 
विश्वास के धागे को सीना
सीते  हुए आगे बढना
निरंतर 
नये जीवन नये सपनो 
नई धरोहर के लिए 
क्यूँ की 
सिर्फ जीना 
और एक जीवन जी कर 
मर जाना ही जीवन नही है|
साहस  कर निरंतर उठना ,
पराजय को  ललकारना 
पछाड़ना 
और प्रगति के  मार्ग  को 
परास्त करना ही जीवन है|
धरोहरों को सहेजना 
और उनसे नई  संरचना 
का  निर्माण  करना ही 
जीवन है|
   @कंचन
  

nav-shringar

रेशमी धूप के साये है 
मौसम भी कुछ गुलाबी है |
पत्ते-पत्ते में है हरियाली
फिजां भी कुछ शराबी है |
झर रही है किरने आसमानों से
 रश्मियाँ गा रही है तराने से  
 छिड़ी  है राग -रागिनियाँ सी ,
सुरों के फैले है उजाले से |
उतर रही है धरा पर साँझ  की दुल्हन
 सिमट  रहे है अब धूप के साये भी |हो रहा है नव-श्रृंगार धरा से गगन  तक,भर रही हो मांग जैसे दुल्हन की |

Wednesday, 14 September 2011

Gazal

क्या हुआ? जो तुम हिन्दू हो मैं मुसलमान हूँ,
तुम भी इन्सान हो, मैं भी इन्सान हूँ |
जलते हैं चिराग मुहब्बत के जब दिलों में,
मिट जाते है फर्क सभी, इन्सान और इन्सान में |

फर्क क्यूँ ,कितना ,कैसा है  कोई समझाए ,
खून का रंग  कहाँ जुदा है कोई बतलाये |
दर्द मुफलिसी का एक -सा है जमाने में ,
फिर कहाँ कोई गैर है ,इस अफसाने में |
सच है  कि तुम हिन्दू हो ,मैं मुसलमान हूँ ,
तुम भी इन्सान हो ,मैं भी इंसान हूँ |

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Saturday, 3 September 2011

Kavita-Saya

महसूस   करो
अपने  अंदर  से
आवाज   आएगी
की तुम 
अकेले  नही  हो
तुम्हारे  साथ 
तुम्हारा  साया   है |
जो  कभी  साथ  नही  छोड़ेगा

अगर तुम  
इसे  महसूस  करोगे |

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