Monday, 30 January 2012

nari albeli

सरसों के खेतों बीच खड़ी
वह नारी अलबेली 
पहने नीली- नीली साडी 
चहुँ  ओर दिखे है हरियाली
 
 पीले- पीले फूल खिले 
मतवाली पवन चले 
लहराता नीला आँचल 
झक नीले आकाश तले
दूर खड़े तरु देखे  कौन ?
यह नारी अलबेली मौन 
मंद-मंद मुस्काती है 
सरसों के फूल खिलाती है ।
     @kanchan

aadha aakash

विशाल समन्दर है 
और
सुर्ख लाल आकाश 
दूर कहीं से मौन 
चला आ रहा कोई जहाज 
सूर्य के सम्मुख खड़ा है 
डूबता सूरज 
आधा आकाश आधा समन्दर में 
बह रहा है ।
लौटते  पंछी  घरों को मचा रहे  कलरव 
दे रहा संकेत सांझ 
निशा के आगमन का ।
  @kanchan